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बिहार मंत्रिमंडल का क्यों नहीं हो रहा है विस्तार राज जान लीजिए

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पटना- बिहार में मंत्रिमंडल का विस्तार कब होगा इस यक्ष प्रश्न का उत्तर हर कोई जानने को बेताब है। बिहार सरकार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। बीजेपी चाल पर चाल चल रही है , नीतीश कुमार बीजेपी नेतृत्व द्वारा चली जा रही चालों को नाकाम करने में लगे हुए हैं। दोनों तरफ से मीटिंग का दौर जारी है, लेकिन अभी कोई नतीजा हासिल नहीं हुआ है। नीतीश कुमार मंत्रिमंडल में आधे की हिस्सेदारी चाहते हैं। बिहार विधानसभा चुनावों में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी बीजेपी राज्य की राजनीति में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है।

अरुणाचल कांड के बाद बीजेपी पर नीतीश का भरोसा डिगा

अरूणाचल में जेडीयू के 6 विधायकों को बीजेपी में शामिल करने के बाद बिहार में बीजेपी बैकफुट पर थी। नीतीश कुमार का गुस्सा देखकर भाजपा 50:50 के लिए मान भी गई थी, लेकिन फिर समय गुजरते ही पार्टी अपने रंग में है।लेकिन अब फिर से बीजेपी ने सीटों के गणित ब्यौरा रख भाजपा ने जेडीयू के सामने अपने लिए 20 से 22 मंत्रीपद की दावेदारी पेश की है। असल में कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या का अनुपात 7 विधायक पर 2 मंत्री की है। इस तरह से विधायकों की संख्या के लिहाज से भाजपा के 20-22 और जदयू के 12-14 मंत्री बन सकते हैं।

नीतीश ने चली बीजेपी की चाल

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भाजपा ने बिहार कैबिनेट में संख्या के आधार पर हिस्सेदारी चाहती है। भाजपा की इस चाहत के बाद नीतीश कुमार की पार्टी ने चाल चल दी है। जेडीयू ने केन्द्रीय कैबिनेट में संख्या के आधार पर हिस्सेदारी की मांग कर दी है।  सांसदों की संख्या के आधार पर जेडीयू ने भाजपा से एक कैबिनेट मंत्रालय और दो राज्य मंत्री की पद मांग लिए हैं। जेडीयू के नेतृत्व ने भाजपा के सामने साफ कर दिया है कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल में ऐसी हिस्सेदारी नहीं दी गई तो बिहार में 50:50 का फार्मूला ही रहेगा।

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बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व निकालेगा हल

बिहार बीजेपी के हाथ से अब मामला निकल कर केंद्रीय नेतृत्व हाथ में पहुंच गया है। अब केंद्रीय नेतृत्व को तय करना है कि इस फंस चुके मामले को कैसे सुलझाया जाए। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री इस मामले पर बिहार बीजेपी के नेताओं से माथापच्ची भी कर चुके हैं। पूर्व अध्यक्ष और गृहमंत्री अमित शाह से बातचीत के बाद इसपर फैसला होगा।

19 फरवरी बजट से पहले बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार का दवाब

19 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र से पहले कैबिनेट विस्तार का दबाव है, लेकिन इससे पहले ही दोनों बड़े दलों को बिहार विधानपरिषद् के राज्यपाल कोटे की 12 सीटों का मनोनयन भी फाइनल करना है। अब बीजेपी के नेतृत्व पर दवाब है कि इस फंस चुके मामले को कैसे सुलझाया जाए। उधर मुख्य विपक्षी दल आरजेडी एनडीए में किसी भी फूट का लाभ लेने के लिए तैयार बैठी है। अब देखना ये होगा कि बिहार में मंत्रिमंडल का विस्तार कब तक होता है।

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