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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद में दिए गए बयान महत्वपूर्ण बिंदू, साधा आंदोलनजीवियों पर निशाना

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जब धन्यवाद ज्ञापित करने के लिए उच्च सदन पहुंचे तो सबकी नजरें इस बात पर थी, कि वो आज क्या कहेंगे। किसान आंदोलन पर उनका क्या वक्तव्य होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहा  जब देश में सुधार होते हैं तो उसका विरोध होता है। उन्होंने कहा कि जब देश में हरित क्रांति आई थी उस समय भी कृषि क्षेत्र में किए गए सुधारों का विरोध हुआ था। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में विपक्ष पर बड़े चुटीले अंदाज प्रहार किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने दो नए शब्दों का भी प्रयोग किया। उन्होंने कांग्रेस पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए कहा कि ये आंदोलनजीवी परजीवी हैं, जो दूसरों को राष्ट्र को खोखला करते हैं। हमें इनसे सावधान रहने की जरूरत है।

उन्होंने दूसरा जो शब्द इस्तेमाल किया वह है -फॉरेन डिस्ट्रक्टिव आइडियोलॉजी। उन्होंने कहा कि हमारा देश विकास कर रहा है ऐसे में हम FDI की बात कर रहे हैं, लेकिन इन दिनों एक नये तरह का FDI सामने आया है जो है फॉरेन डिस्ट्रक्टिव आइडियोलॉजी। यह विचारधारा हमारे देश को तोड़ना चाहती है, इसलिए हमें इनसे बचना होगा। हमें फाॅरेन डायरेक्ट इंवेस्टमेंट की तो जरूरत है लेकिन फॉरेन डिस्ट्रक्टिव आइडियोलॉजी की नहीं।

किसानों से किया आंदोलन समाप्त करने का आग्रह

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलनरत किसानों से अपना आंदोलन समाप्त कर कृषि सुधारों को एक मौका देने का आग्रह किया और कहा कि यह समय खेती को ‘‘खुशहाल” बनाने का है और देश को इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब देश में सुधार होते हैं तो उसका विरोध किया जाता है। जब देश में हरित क्रांति आई थी उस समय भी कृषि क्षेत्र में किए गए सुधारों का विरोध हुआ था।

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कोरोना काल में भारत की लड़ाई की विश्व ने सराहना की

प्रधानमंत्री ने कहा कि  कोरोना वायरस को लेकर विश्व ने भारत के संबंध में कई आशंकाएं जतायी थीं और कहा गया था कि यहां करोड़ों लोग फंस जाएंगे, लाखों लोग मर जाएंगे। आज, विश्व मानवता की रक्षा के लिए भारत द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना कर रहा है, इसका श्रेय भारत को जाता है, न किसी सरकार को और न ही किसी व्यक्ति को, और हमें इस पर गर्व होना चाहिए।

विपक्ष पर साधा निशाना

धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेने वक्ताओं का धन्यवाद करते हुए प्रधानमंत्री ने अभिभाषण का बहिष्कार करने पर विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अच्छा होता, राष्ट्रपति जी का भाषण सुनने के लिए सब होते  तो लोकतंत्र की गरिमा और बढ़ जाती।  पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में ताकत इतनी थी कि न सुनने के बावजूद भी विपक्षी सदस्य सदन में ‘‘बहुत कुछ” बोल पा रहे थे। यह अपने आप में उनके भाषण की ताकत है, उन विचारों की ताकत है, उन आदर्शों की ताकत है जो न सुनने के बाद भी पहुंच गई।

हमारा लोकतंत्र मानव संस्था है

प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा में कहा कि भारत का लोकतंत्र पश्चिमी संस्था नहीं है, यह मानव संस्था है। भारत का राष्ट्रवाद न तो संकीर्ण है, न ही आत्म-केंद्रित है, और न ही आक्रामक है। कोरोना काल में भारत में रिकॉर्ड निवेश हुआ , दुनिया में निराशा के माहौल के बीच देश में दोहरे अंक में वृद्धि होने की उम्मीद है।

मनमोहन सिंह और शरद पवार को दिलाई कृषि सुधारों की याद

पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार, कांग्रेस पार्टी ने कृषि सुधारों का समर्थन किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि उत्पादों की बिक्री से संबंधित बाधाओं को दूर करने की जरूरत को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को उद्धृत किया. उन्होंने कहा कि रिकार्ड उत्पादन के बावजूद कृषि क्षेत्रों में समस्याएं बनी हुयी हैं और उनका समाधान मिलकर खोजना होगा। कृषि सुधारों को एक अवसर देना चाहिए, बदलाव के लिए हम तैयार हैं।

 

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