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सीमा पर तनातनी बीच भारत बना चीन का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर, क्या आत्मनिर्भर भारत की मुहिम फ्लॉप हो रही है

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नई दिल्ली- चीन के साथ सीमा पर भारत की तनातनी चल रही है। केंद्र की मोदी सरकार चीन पर निर्भरता को कम करने के लिए ‘आत्मनिर्भर भारत’ की मुहिम चला रही है। लेकिन भारत और चीन के बीच ट्रेड में इस मुहिम का कोई असर होता नहीं दिख रहा है। भारत एक बार फिर से चीन का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर बनकर उभरा है। कोरोना महामारी और सीमा पर तनाव के चलते भारत सरकार ने चीन के साथ रिश्तों को शिथिल कर दिया था।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक कॉमर्स मिनिस्ट्री द्वारा जारी किए गए स्थाई आंकड़ों  के अनुसार भारत और चीन के बीच पिछले साल द्विपक्षीय व्यापार 77.7 अरब डॉलर का रहा। हालांकि यह 2019 की तुलना में कम है जब दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 85.5 अरब डॉलर रहा था। लेकिन इसके बावजूद चीन भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर बन गया है।

चीन के साथ भारत का सबसे ज्यादा व्यापारिक घाटा

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चीन के साथ भारत का व्यापारिक घाटा सबसे ज्यादा बना हुआ है। चीन के भारत का व्यापारिक घाटा 40 अरब डॉलर का है जो किसी अन्य देश की तुलना में सबसे अधिक है। महामारी के कारण मांग में कमी से 2020 में भारत और अमेरिका के बीच 75.9 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। पिछले साल सीमा पर खूनी संघर्ष के बाद मोदी सरकार ने चीन पर निर्भरता कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। चीन के कई मोबाइल ऐप्स को बैन किया गया है, चीन के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी देने की प्रक्रिया धीमी कर दी गई है और आत्मनिर्भर भारत पर जोर दिया गया है। लेकिन इसके बावजूद भारत भारी मशीनरी, टेलिकॉम इक्विपमेंट और होम अप्लायंसेज पर काफी हद तक चीन से आयात पर निर्भर है।

आर्थिक मामलों के जानकार सम्भ्रांत कृष्ण सिंह का कहना है कि हमें चीन के साथ बढ़ते व्यापारिक घाटे पर लगाम लगाने के लिए कुछ सख्त कदम उठाने की जरूरत है। भारत सरकार को चीन के द्वारा अपनाए जा रहे अनुचित व्यापारिक तरीकों पर कदम उठाने की जरूरत है। चीन से भारत के कृषि उत्पाद जैसे चावल के लिए चीनी बाजार को खोलने के लिए दवाब बनाने की जरुरत है। अगर चीन भारतीय उत्पादों के लिए अपने बाजार नहीं खोलता है तो हमें भी सख्त कदम उठाते हुए कुछ चीनी प्रो़डक्ट पर बैन लगा देना चाहिए।

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आत्मनिर्भर भारत के सवाल पर सम्भ्रांत कृष्ण सिंह कहते हैं कि आत्मनिर्भर भारत का मतलब यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि भारत खुद में एक सेल्फ डिपेडेंट और सेल्फ सफिसिएंट इकोनॉमी बन जाएगा। आत्मनिर्भर भारत का मतलब उन क्षेत्रों से हैं जहां हमारा देश अच्छा कर सकता था लेकिन कर नहीं पाया। जैसे हम मोबाइल कम्पोनेंट के क्षेत्र में अच्छा कर सकते थे और इसके लिए हमें चीन पर निर्भर रहने की कोई जरूरत नहीं थी। लेकिन पूर्ववर्ती सरकारें ऐसा कोई इकोसिस्टम विकसित नहीं कर पाईं जिसकी वजह से विश्व के दूसरे सबसे बड़े बाजार की निर्भरता अभी भी चीन पर बनी हुई है।

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