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आखिर क्यों अमरोहा जिला जज ने नही जारी किया शबनम का डेथ वारंट, जानिए क्या है कानूनी पेंच

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लखनऊ – शबनम सलीम को फांसी देने की पूरी तैयारी लगभग कर ली गई। फांसी घर की मरम्मत से लेकर रस्सी तक इंतजाम कर लिया गया हैं। अब ऐसे में बस इंतजार है तो मृत्यु की तारीख का, जिसे अमरोहा जिला जज ने एक बार फिर जारी करने से विलंब कर दिया हैं।

अब सवाल है कि शबनम के फांसी को लेकर देर किस बात की है? तो जानिए, यूपी के अमरोहा जिला जज के यहां से बामनखेड़ी नरसंहार की दोषी शबनम अली का डेथ वारंट जारी नही होने का कारण है कि राज्यपाल के यहां शबनम सलीम की दयायाचिका पेंडिग है जिसके कारण कानूनी अड़चन आ गई है। बावजूद इसके सरकारी वकील ने अदालत से डेथ वारंट जरूर मांगा है।

आपको बता दें कि शबनम के फांसी के सारे रास्ते अगर साफ होते है तो वह आजाद भारत की पहली ऐसी महिला होगी जिसे फांसी के तख्त पर चढ़ाया जाएगा।

फांसी को लेकर धार्मिक ऐंगल आया सामने

इस बीच फांसी को लेकर धार्मिक ऐंगल भी सामने आया है अय़ोध्या के संत महंत परमहंस दास ने राष्‍ट्रपति राम नाथ कोविंद से अपील की है कि वह शबनम की फांसी की सजा माफ कर दें। अगर शबनम को फांसी दी जाती है तो आजादी के बाद किसी महिला को फांसी देने का पहला मामला होगा।

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महंत परम हंस दास

महंत परमहंस दास ने बताया कि, ‘हिंदू शास्‍त्रों में महिला का स्‍थान पुरुष से उत्तम है। एक महिला को मृत्‍युदंड देने से समाज क्रूर माना जाता है, और इससे समाज का भला नहीं होगा, बल्कि इससे दुर्भाग्‍य और आपदाओं को न्‍यौता मिलेगा। यह सही है कि उसका अपराध अक्षम्य है लेकिन उसे महिला होने के नाते क्षमा किया जाना चाहिए।’

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महंत ने आगे कहा, ‘हिंदू धर्म के गुरु होने के नाते मैं राष्‍ट्रपति से अपील करता हूं कि शबनम की दया याचिका को स्‍वीकार कर लें। जेल में अपने अपराध के लिए वह प्रायश्चित कर चुकी है। अगर उसे फांसी दी गई तो यह इतिहास का सबसे दुर्भाग्‍यपूर्ण अध्‍याय होगा। हमारा संविधान राष्‍ट्रपत‍ि को असाधारण शक्तियां देता है, उन्‍हें इन शक्तियों का प्रयोग क्षमा देने में करना चाहिए।’

गौरतलब है कि यूपी के अमरोहा जिले के बाबनखेड़ी गांव में 14-15 अप्रैल 2008 की रात को प्रेमी के साथ मिलकर अपने परिवार के सात सदस्यों को मौत के घाट उतारने वाली शबनम और उसके प्रेमी सलीम को न्यायलय के हर चौखट से फांसी का फरमान आया है।

बेटे से बोली शबनम.. मैं बेकसूर हुँ, तुम खूब मन लगाकर पढ़ना

शबनम इस समय रामपुर जेल में बंद हैं, बीते दिनों उससे मिलने बेटा ताज औऱ उसका केयर टेकर उस्मान जेल पहुंचा। मां शबनम और बेटे ताज की लगभग एक घंटे मुलाकात चली। मुलाकात के दौरान ताज पहली बार अपनी मां से पुछा कि क्या यह गुनाह आपने किया हैं, मां का जवाब – उसे फंसाया गया हैं।

शबनम और बेटे ताज

शबनम ने कहा कि वह पहले भी इस मामले की जांच की मांग करती रही है लेकिन कोर्ट ने उसकी जांच की मांग नही मानी। बेटे को देख शबनम भावुक थी, उसने अपने बेटे से कहा कि खूब मन लगाकर पढ़ना। बेटे का केयर टेकर उस्मान ने कहा कि अगर शबनम ने यह गुनाह किया है तो उसे बिल्कुल भी बचाना नही चाहिए। एक बार शबनम को मीडिया से बात करने की अनुमति दी जाए। केयर टेकर उस्मान ने कहा कि शबनम सीबीआई जांच की मांग कर रही हैं।

शबनम जूलाई 2019 से जेल में बंद है। सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा बरकरार के बाद राष्ट्रपति ने भी दया याचिका खारिज कर दी हैं। फांसी की बात सुनकर शबनम और उसका बेटा ताज घबरा गया। दोनों एक दूसरे से मिलना चाहते थे, इसलिए उन्होंने मिलने की इजाजत मांगी थी।

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