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नीतीश के विधायक गए थे गांव में दबंगई दिखाने, गांव वालों ने घेर कर सारी गर्मी झाड़ दी, जानिए पूरा मामला

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पटना – लोकतंत्र में वीवीआईपी कल्चर को तरजीह देना अब लोगों ने बंद कर दिया हैं। अब विधायक जी को कहां और कितना सम्मान मिलना चाहिए, इस बात को गांव के लोग भली भांती समझने लगे हैं। (MLA Narendra Neeraj News) इसी से जुड़ा एक मामला बिहार के गोपालपुर का हैं जहां के विधायक नरेद्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल को गांव वालों ने घेर कर घंटों बंधक बनाए रखा।

आपको बता दें कि विधायक गोपाल मंडल  अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार विधायक नरेंद्र नीरज अपनी दंबगई अंदाज को लेकर चर्चा में गए। दरअसल मामला बांका जिले के बौसी थाना क्षेत्र का है। जहां श्याम बाजार स्थित दुर्गा मंदिर के पास जमीन को अपने कब्जे में करने के लिए हथियार से लैस होकर जदयू के गोपालपुर विधायक नरेंद्र कुमार नीरज ने जमकर हंगामा किया।

मिली जानकारी के मुताबिक, चार वाहनों से करीब 15-20 लोग, हथियार और दर्जनों लाठी लेकर पहुंचे विधायक और उनके गुर्गों ने वहां के स्थानीय नंदकिशोर साह का कॉलर पकड़कर हंगामा शुरू किया और अपनी गाड़ी में उन्हें बिठाने की कोशिश करने लगे। जिस पर नंदकिशोर साह के साथ आए कुमोद यादव और जितेंद्र यादव ने विरोध करना शुरू किया।

जैसे ही इस बात का पता चला कि विधायक के कुछ लोग नंदकिशोर साह को गाड़ी में बिठाकर कहीं ले जाना चाहते हैं वैसे ही गांव वालों की भीड़ एकत्रित होने लगी। देखते ही देखते लोगों की भारी भीड़ ने विधायक नरेंद्र नीरज को अपने वश में कर लिया। यह मामला विधायक जी के लिए उल्टा पड़ गया, गांव की भीड़ ने विधायक और उनके गुर्गे को घंटों बंधक बना कर रखा। घटना की जानकारी मिलते ही थानाध्यक्ष राजकिशोर सिंह के निर्देश पर एसआई केदार पासवान पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और आक्रोशित ग्रामीणों को शांत कराया।

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पुलिस के मौके पर पहुंचे के बाद जेडीयू विधायक नरेंद्र कुमार ने स्थानीय लोगों से माफी भी मांगी तब जाकर लोगों का गुस्सा शांत हुआ। इस दौरान करीब 1 घंटे तक चले हाई वोल्टेज ड्रामा के बाद विधायक अपने गुर्गों के साथ वहां से रवाना हुए। वहीं मामले में नंदकिशोर साह ने भी बताया कि विधायक और उनके गुर्गों ने उनके साथ बदतमीजी की।

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ये है पूरा मामला

इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय अनिरुद्ध यादव और बरमसिया गांव निवासी जदयू के उमेश यादव घटनास्थल पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद मामले को शांत कराया गया। बताया गया कि वहां की करीब 20 एकड़ जमीन को विधायक नरेंद्र कुमार खुद की जमीन बता रहे थे। विधायक का कहना था कि उक्त जमीन उसने शंभू राय सहित अन्य भाइयों से खरीदी है। वहीं दूसरे पक्ष के लोगों ने कहा कि करीब 50 सालों से इस जमीन पर स्थानीय लोगों का कब्जा है। जिस पर वह लोग मकान बनाकर रह रहे हैं।

सवाल यह उठता है कि एक जमीन 2 -2 लोगों को किस आधार पर बेची गई और कैसे इसका कागजात तैयार हो पाया। मामले की जांच अंचल कार्यालय तक भी पहुंच सकती है। हालांकि घटना के बाद विधायक ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि 24 मार्च को इस मामले में बैठकर हम लोग आपस में फैसला करेंगे। साथ ही बताया कि जमीन के कागजात लेकर पहुंचेंगे। जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि जमीन किसकी है। अगर जमीन आप लोगों की हुई तो हम इसे छोड़ देंगे।

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