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बिहार सरकार में इतने मंत्री दाग़ी, तेजस्वी ने उठाना चाहा मामला, नहीं मिला मौक़ा

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पटना – बिहार विधानसभा के बजट सेशन में आज नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कागजों का चिट्ठा लिए सदन पहुंचे थे। सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो नेता प्रतिपक्ष ने स्पीकर को बताया कि उनके पास दागी मंत्रियों के लिस्ट हैं, तो स्पीकर ने कहा कि इसे आप शुन्यकाल में परोसियेगा, फिलहाल प्रश्नोत्तर काल चलने दीजिए, स्पीकर के जवाब सुनते ही नेता प्रतिपक्ष ने धैर्य से 1 घंटे तक बैठे रहें, और जैसे ही शुन्यकाल शुरू हुआ तेजस्वी यादव कागज का चिट्ठा लेकर खड़े हो गए।

तेजस्वी यादव ने एक के बाद एक आंकड़ों के जरिए निशाना साधते रहें। उन्होंने खुलासा करते हुए कहा कि नीतीश कैबिनेट के 31 मंत्रियों में से 18 यानी 64 प्रतिशत मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। आपको बता दें कि दागी मंत्रियों को लेकर यह हमला तेजस्वी का पहला नहीं हैं। तेजस्वी ने पहले भी दागी मंत्रियों को लेकर बिहार सरकार पर हमला बोला था। उस दौरान स्पीकर विजय सिन्हा ने कहा था कि सबूत लेकर आइएगा तो मामले को उठाइएगा। इस तरह खड़े होकर किसी पर आरोप लगाना ठीक नहीं है। उस वक्त तेजस्वी ने कहा था कि मैं सबूत आसन को उपलब्ध कराऊंगा। वही सबूत लेकर तेजस्वी शुक्रवार को सदन पहुंचे थे।

दागी मंत्रियों के लिस्ट यानी की सबूत को तेजस्वी यादव ने विधानसभा अध्यक्ष के चेंबर को भी उपलब्ध कराया। प्रश्नकाल की कार्यवाही खत्म होने के बाद ही तेजस्वी यादव ने इस मामले को सदन में रखा। उन्होंने कहा कि उनके पास नीतीश कैबिनेट में शामिल 64 फीसदी मंत्रियों से जुड़ा अपराधिक रिकॉर्ड है, जो एडीआर संस्था की तरफ से दी गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि सदन में जब उन्होंने मंत्री रामसूरत राय के ऊपर आरोप लगाए था, तो सत्ता पक्ष की तरफ से सबूत मांगा गया था। आसन ने यह भी कहा था कि इस संबंध में दस्तावेज और साक्ष्य के आधार पर ही कोई बात कहें, आज वह सबूत लेकर आया हूं।

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तेजस्वी यादव ने कहा कि एडीआर की रिपोर्ट मंत्रियों की तरफ से चुनाव के दौरान खुद दिए गए हलफनामे के आधार पर है। सबने यह माना है कि उनके ऊपर अपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होंने इस रिकॉर्ड को सदन में प्रोसिडिंग का हिस्सा बनाए जाने की मांग रखी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि एडीआर की रिपोर्ट सार्वजनिक है और पहले से ही यह पब्लिक डोमेन में है। ऐसे में इसे सदन में एक बार फिर से रखने का कोई औचित्य नहीं। एडीआर (Association for Democratic Reforms) की रिपोर्ट में मेरा भी नाम होगा।

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