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आज से RSS के कामकाज का जिम्मा दत्तात्रेय होसबोले संभालेंगे, जानिए कौन है होसबोले

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बेंगलुरू- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा ने दत्तात्रेय होसबोले को अपना ‘सरकार्यवाह’ चुना। वह वर्तमान सर कार्यवाह भैयाजी जोशी की जगह लेंगे। होसबोले 2009 से आरएसएस के सह सरकार्यवाह थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में दूसरे सबसे महत्वपूर्ण पद के लिए चुनाव अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS) की बैठक में हुआ।

। सुरेश भैय्याजी जोशी 2009 से सरकार्यवाह यानी महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। तीन साल पहले 2018 में भी उन्होंने पद छोड़ने की पेशकश की थी। पर 2019 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए उनका कार्यकाल बढ़ाया गया था।

संघ में होने वाले बड़े बदलावों के मद्देनजर बेंगलुरु की बैठक महत्वपूर्ण रही । यह पहला मौका है जब हर तीन साल में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक नागपुर से बाहर हो रही है। आम तौर पर इस सभा में 1,500 प्रतिनिधि भाग लेते हैं, पर इस बार कोरोनावायरस संक्रमण को देखते हुए सिर्फ 450 प्रतिनिधि ही बेंगलुरु में इस बैठक में भाग ले रहे हैं। करीब 1,000 प्रतिनिधि 44 स्थानों से वर्चुअल तौर पर बैठक से जुड़े रहे हैं।

संघ प्रमुख या सरसंघचालक के लिए चुनाव नहीं होते। संघ प्रमुख अपने उत्तराधिकारी की नियुक्ति करते हैं। केएस सुदर्शन ने ही मौजूदा सरसंघचालक मोहन भागवत की नियुक्ति की थी। पर संघ प्रमुख की भूमिका मुख्य तौर पर मार्गदर्शन की होती है। संगठन का सारा कामकाज सरकार्यवाह ही देखते हैं।

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सरकार्यवाह का चुनाव हर तीन साल में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में होता है। तीन साल का ही कार्यकाल भी होता है। आम तौर पर सभा की बैठक मार्च के दूसरे या तीसरे हफ्ते में तीन दिन के लिए होती है लेकिन कोरोना को देखते हुए यह बैठक इस बार दो दिन ही चली।

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जहां तक सालाना बैठक का सवाल है तो वह देशभर में कहीं भी हो सकती है। पर तीन साल में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक हमेशा से नागपुर में होती आई है। पिछले साल की सालाना बैठक बेंगलुरु में होनी थी, पर अंतिम क्षणों में उसे कैंसिल कर दिया गया था। उस समय तक कई प्रतिनिधि बेंगलुरु पहुंच भी चुके थे।

आम तौर पर सरकार्यवाह अपने कार्यकाल में किए गए कामों की जानकारी देते हैं। साथ ही सूचना देतें हैं कि उसका कार्यकाल खत्म हो गया है, इस वजह से नया सरकार्यवाह चुना जाना चाहिए। तब वरिष्ठ स्वयंसेवकों में से किसी को चुनाव अधिकारी नियुक्त किया जाता है। कोई वरिष्ठ नेता नए सरकार्यवाह के नाम का प्रस्ताव रखता है। यह नाम आम तौर पर स्वीकार कर लिया जाता है और सरकार्यवाह को निर्वाचित घोषित किया जाता है। चुने जाने के बाद नया सरकार्यवाह ही अपनी टीम की घोषणा करता है।

सुरेश भाइयाजी जोशी ने सरकार्यवाह की जिम्मेदारी लगातार 4 टर्म निभाई है। अब उन्हें पदमुक्त कर दिया गया है। वे 74 वर्ष के हो चुके हैं। इस बार जो सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले को दी गई है।वो अभी 65 साल के हैं उम्मीद है कि वह यह जिम्मेदारी 2025 में संघ के शताब्दी वर्ष तक निभाएंगे इस दौरान 2024 के लोकसभा चुनाव भी महत्वपूर्ण हैं। वहीं, 2018 में जोशी पद छोड़ने के संकेत दे चुके हैं।

आम तौर पर सरकार्यवाह का चुनाव सह-सरकार्यवाहों यानी संयुक्त महासचिव में से होता है। पर यह अनिवार्य नहीं है। 2009 में जब जोशी सरकार्यवाह चुने गए थे, तब वे अखिल भारतीय सेवा प्रमुख थे, सह-सरकार्यवाह नहीं थे।

। दत्तात्रेय होसबोले दक्षिण भारत से ताल्लुक रखते हैं संघ का दक्षिण पर फोकस है। दक्षिण भारत के कई राज्यों में चुनाव हैं। कर्नाटक से ताल्लुक रखने वाले होसबोले इसमें मददगार हो सकते हैं। एबीवीपी में लंबे समय तक रहने के दौरान दत्तात्रेय के पास संगठन चलाने का अनुभव भी है।

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