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पटना हाईकोर्ट ने कहा – बिहार में पुलिस और माफियाओं की मिली भगत से चलता शराब का धंधा

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पटना – बिहार के मुजफ्फरपुर में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया हैं। चाढ़े चार सौ लीटर शराब जब्ती के आरोपी बिना कोर्ट के आदेश से ही छूट गया हैं, इस हाईकोर्ट ने आपत्ती जताते हुए कहा कि प्रदेश में पुलिस औऱ माफियाओं की मिली भगत से ही शराब के कारोबार को अंजाम दिया जा रहा हैं।

यह बयान जज बिरेंद्र कुमार की एकल पीठ ने उस समय की जब मुजफ्फरपुर में एक अभियुक्त जितेंद्र यादव के वकील ने बिना बहस के ही जमानत अर्जी वापस ले ली, साफ है कि अभियुक्त को जमानत पाने के लिए कोर्ट में बहस की जरूरत ही नहीं पड़ी।

वकील ने कोर्ट को बताया कि निर्धारित सीमा( 60 दिन ) के भीतर अगर पुलिस आरोप पत्र दायर नहीं कर पाती हैं तो भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 167 के मुताबिक आरोपी स्वतः ही जमानत का हकदार होगा और इसी का लाभ मुजफ्फरपुर के अभियुक्त को मिला।

60 दिनों के भीतर पुलिस का इन्वेस्टीगेशन नहीं हो सका

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इस मामले में कोर्ट ने 4 अप्रैल को मुजफ्फरपुर के वरीय आरक्षी अधीक्षक को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया हैं। अधीक्षक को कोर्ट में हाजिर होकर बताना होगा कि आखिर किस कारण पुलिस अनुसंधान कार्य पूरा नहीं कर सकी औऱ अभियुक्त को लाभ मिल गया।
ये है पूरा मामला।

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आरोपी जितेंद्र यादव पर मुजफ्फरपुर के कांटी थाना कांड संख्या 776/2019 दर्ज हुआ था। इस घटना में अभियुक्त के पॉलट्री फॉर्म से 466 लीटर विदेशी शराब पाया गया था। आरोपी अपने बचाव के लिए जिला न्यायालय में जमानत अर्जी दाखिल किया था, लेकिन वहां उसे जमानत नहीं मिली। जिसके बाद अभियुक्त द्वारा 23 दिसंबर को पटना हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दायर की गई। लेकिन इस बीच पुलिस ने अपना काम ठीक से नहीं कर पाया, समय सीमा के अन्दर आरोप पत्र दायर नहीं हुई और अभियुक्त को बिना सुनवाई के ही जमानत मिल गया।

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