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हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग और केन्द्र को भेजा नोटिस, मास्क न लगाने पर आम आदमी से वसूली और नेताओं की छूट क्यों

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नई दिल्ली – देश भर में एक बार फिर कोरोना ने दस्तक देना शुरू कर दिया हैं। बुधवार को 1 लाख 26 हजार कोरोना संक्रमण के मामले आने के बाद हर कोई सहमा हुआ हैं। कई राज्य सरकारों ने नाईट लॉकडाउन की नियमें लागू कर दी हैं। लेकिन इस बीच बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान रैली में हजारों की संख्या भीड़ का जुटना अपने आप में सवाल खड़े कर रहा हैं। जहां एक तरफ देश में मास्क पहनना और दो गज की दूरी पर आम लोगों को जुर्माना देना पड़ रहा हैं वहीं चुनाव में नेताजी बिना मास्क के नजर आ रहे हैं औऱ रैली लोगों ने मास्क के साथ साथ दो गज की दूरी का भी कोई ख्याल नहीं रख रहें हैं। इसी संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केन्द्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा हैं। ( Highcourt sent Notice to centre and EC)

चुनाव में बिना मास्क और रैली की भीड़ के मामले को लेकर 17 मार्च को यूपी के पूर्व DGP और थिंक टैंक सीएएससी के चेयरमैन विक्रम सिंह ने एक याचिका डाली थी। इस पर न्यायालय ने 22 मार्च को नोटिस जारी करके केंद्रीय गृह मंत्रालय और चुनाव आयोग से 30 अप्रैल के पहले अपना जवाब दायर करने का आदेश दिया। उसके बाद 23 मार्च को केंद्र सरकार ने कोरोना की नई गाइडलाइंस जारी की थीं।
उच्चत्तम न्यायालय में वकील विराग गुप्ता ने बताया कि इस याचिका में कानून के सामने ‘बराबरी’ और ‘जीवन’ के मूल अधिकारों का हवाला देते हुए कहा गया है कि देश में सबके लिए नियम कायदे सभी के लिए एक होने चाहिए। चुनाव प्रचार के दौरान अगर प्रत्याशी, स्टार प्रचारक या समर्थक मास्क लगाने का नियम तोड़ें तो उन पर स्थायी तौर पर या फिर एक तय समय के लिए चुनाव प्रचार पर रोक लगा देनी चाहिए। चुनाव आयोग मीडिया के जरिए 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में ‘मास्क’ और ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ को लेकर जागरुकता लाए।

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बता दें कि विराग अनमास्किंग वीआईपी किताब के लेखक भी हैं। उन्होंने यह किताब पिछले साल लॉकडाउन के समय लिखी थी। गुप्ता इस किताब में कहते हैं कि बिना मास्क लगाए चुनावी रैलियों को लीड करने वाले ये नेता करोड़ों देशवासियों और अर्थव्यवस्था के लिए बड़े खतरे पैदा कर सकते हैं। एक तरफ जहां आम आदमी पर मास्क न लगाने पर जुर्माना थोपने के साथ उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ नेता बिना मास्क लगाए बड़ी रैलियां और रोड शो कर रहे हैं।’ इस किताब में बिना मास्क लगाए रैलियों में प्रचार करते नेताओं की फोटो बतौर सबूत दी गई हैं। अब तक आम जनता पर लगाए गए जुर्माने की भारी भरकम रकम का राज्यवार ब्योरा भी दिया गया है।

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