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अगर यूपी में पंचायत चुनाव नहीं टाले जाते हैं तो कोरोना का भीषण रूप देखेगा प्रदेश

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नई दिल्ली- पूरे देश में कोरोना भीषण तेजी से लोगों को संक्रमित कर रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यूपी में हो रहे पंचायत चुनाव को क्या टाल देना चाहिए। जब कोरोना की यह लहर खत्म हो जाए तो पुनः चुनाव कराए जा सकते हैं। अगर इस महामारी के दौर में चुनाव होते हैं तो फिर यूपी को कोरोना का सुपर स्टेट बनने के लिए तैयार रहना होगा। फिलहाल यूपी में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 20 हजार प्रतिदन को पार कर गया है और दिन प्रति दिन संक्रमितों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है।  राज्य में ऐक्टिव केसों की संख्या 1 लाख 11 हजार के पार पहुंच गई है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद संक्रमित हो चुके हैं। प्रदेश की टॉप ब्यूरोक्रेसी लगभग संक्रमित हो चुकी है। ऐसे हर कोई इस सवाल को उठा रहा है कि क्या पंचायत चुनाव के लिए यह वक्त सही है। अगर राज्य में कोरोना के मामलों में बेहताशा वृद्धि होती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। देश में कोरोना के कारण परीक्षाएं टाली जा सकती हैं, रद्द की जा सकती हैं। फिर पंचायत चुनावों को टालने में कौन सी परेशानी हैं।

क्या पंचायत चुनावों में लोगों की जान से महत्वपूर्ण है?

क्या पंचायत चुनाव लोगों की जान से महत्वपूर्ण हैं। पंचायत चुनाव ऐसे चुनाव हैं जिनको टाला जा सकता है और इससे प्रदेश की शासन व्यवस्था या प्रशासनिक व्यवस्था पर कोई फर्क भी नहीं पड़ेगा। मुझे पंचायत चुनावों का इस देश की शासन व्यवस्था में कोई महत्वपूर्ण रोल नजर नहीं आ रहा है खासकर कोरोना महामारी के काल में। इन चुनावों को टालने से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

पंचायत चुनाव कोरोना का गांव तक ले जाएंगे

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दरअसल पंचायत चुनावों का  रोल वास्तविकता देश में नए नेता पैदा करने से ज्यादा कुछ नहीं है। ग्राम प्रधान पद के चुनावों में 100 प्रतिशत तक मतदान होता है। शराब , धन, बल का खुलकर प्रयोग होता है। यहां तक कि शहर में निवास कर रहे गांव के लोगों को प्रधान पद के उम्मीदवार पैसे देकर या फिर कार की व्यवस्था करके वोट डालने के लिए बुलाते हैं। ऐसे में शहरों में निवास कर रहे ये गांव के वोट सुपर स्प्रेडर की भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में अगर प्रदेश सरकार को गांवों को कोरोना से बचाना है तो पंचायत चुनावों पर रोक लगानी ही होगी।

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अगर गांव तक पंहुचा कोरोना तो काबू करना मुश्किल होगा

अगर कोरोना गांव तक पंहुच जाता है तो फिर कोरोना से प्रदेश में क्या होगा इसका अंदाजा भी लगाना मुश्किल हैं। क्या प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं ऐसी हैं जो लाखों कोरोना पीड़ितों का बोझ सह सकती हैं। अगर लाखों संक्रमित प्रदेश में हो जाते हैं तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्थिति कितनी भयावह होगी। प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं बिल्कुल चरमरा जाएंगी। इसलिए सही मौका है कि प्रदेश सरकार कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाकर प्रदेशवासियों की जान सुरक्षित कर सकती है। पंचायत चुनाव बाद में भी हो सकते हैं। नहीं तो हमें स्पेनिस फ्लू को दौर को याद कर लेना चाहिए जहां सेकेंड वेब थर्ड वेब में लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। महामारी की पहली वेब के मुकाबले दूसरी और तीसरी वेब हमेशा से जानलेवा साबित होती रही हैं। इतिहास मुश्किल वक्त में सही निर्णय लेने वालों को याद रखता है।

राहुल तालान स्वतंत्र पत्रकार हैं लेख में लेखक के निजी विचार हैं, दजंतरमंतर का लेखक के विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं है।

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