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राजद्रोह के मामले में पत्रकार विनोद दुआ को राहत, सुप्रीम कोर्ट के FIR निरस्त करने के निर्देश

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नई दिल्ली- राजद्रोह के मामले में पत्रकार विनोद दुआ को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि पत्रकार कानूनी रूप से सुरक्षा मिलने का अधिकार रखता है।

विनोद दुआ पर यह मामला हिमाचल प्रदेश के शिमला में दर्ज कराया गया था। दुआ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबंध में टिप्पणी की थी। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। दुआ ने इस मामले में एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी साथ ही यह भी कहा था कि राजद्रोह के मामले में एक कमेटी को जांच के आदेश दिये जाने चाहिए। इस पूरे मामले में अदालत ने केदारनाथ सिंह वर्सेस  बिहार सरकार मामले का भी जिक्र किया उन्होंने कहा, ऐसी धाराएं तब लगानी चाहिए जब शांति बिगाड़ने की कोशिश की गयी हो।

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विनोद दुआ पर आरोप लगाये गये थे कि यूट्यूब पर आये शो ‘विनोद दुआ शो’ के दौरान पत्रकार ने जो टिप्पणी की थीं, वो सांप्रदायिक नफरत फैलाने और शांति भंग कर सकती थी। यूट्यूब पर इस कार्यक्रम को 30 मार्च 2020 को प्रसारित किया गया था।

केदारनाथ वर्सेस बिहार सरकार- सरकार पर टिप्पणी राजद्रोह नहीं

1962 में सुप्रीम कोर्ट ने केदारनाथ बनाम बिहार राज्य के वाद में महत्वपूर्ण व्यवस्था दी थी। अदालत ने कहा था कि सरकार की आलोचना या फिर प्रशासन पर कॉमेंट करने से राजद्रोह का मुकदमा नहीं बनता। राजद्रोह का केस तभी बनेगा जब कोई भी वक्तव्य ऐसा हो जिसमें हिंसा फैलाने की मंशा हो या फिर हिंसा बढ़ाने का तत्व मौजूद हो।

राजद्रोह का मामला शुरू से ही विवादों के घेरे में रहा है। पांच साल पहले सुप्रीम कोर्ट में इसको लेकर एक अर्जी दाखिल की गई थी और राजद्रोह कानून पर सवाल उठाया गया था। तब सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया गया था कि राजद्रोह से संबंधित कानून का सरकार दुरुपयोग कर रही है। याचिकाकर्ता ने तब कहा था कि संवैधानिक बेंच ने राजद्रोह मामले में व्यवस्था दे रखी है बावजूद इसके कानून का दुरुपयोग हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट में कॉमनकॉज की ओर से दाखिल अर्जी में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने 1962 ने केदारनाथ बनाम बिहार राज्य के मामले में जो व्यवस्था दे रखी है उसे पालन किया जाना चाहिए और इसको लेकर सरकार को निर्देश दिया जाना चाहिए।

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