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एलजेपी की टूट की इनसाइड स्टोरी- चाचा के केंद्रीय मंत्री बनने की इच्छा की भेंट चढ़ गई चिराग की एलजेपी

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नई दिल्ली- एलजेपी की टूट से चिराग पासवान सन्न हैं। वो अपने चाचा के घर पर पहुंचे। चिराग पासवान लगातार अपनी गाड़ी का हॉर्न बजाते रहे लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला। पंद्रह मिनट तक हॉर्न बजाने के बाद दरवाजा जब खुला लेकिन अंदर का दरवाजा अभी भी बंद है। लेकिन सवाल उठ रहे हैं आखिर क्यों पशुपति पारस एलजेपी और चिराग के साथ छल किया है।

हाजीपुर से सांसद पशुपति पारस ने चिराग पासवान का बिना नाम लिए निशाना साधते हुए कहा कि कुछ असामाजिक तत्वों ने आकर हमारी पार्टी में सेंध लगाई। पार्टी की बागडोर जिनके हाथ में गई उन्होंने 99 फीसदी कार्यकर्ता की भावना की अनदेखी कर गठबंधन को तोड़ दिया। गठबंधन भी तोड़ा तो बेहद अजीब तरीके से, किसी से दोस्ती करेंगे, किसी से प्यार करेंगे, किसी से नफरत करेंगे। इसका परिणाम यह हुआ कि बिहार में एनडीए गठबंधन कमजोर हुआ, लोक जनशक्ति पार्टी बिल्कुल समाप्ति के कगार पर चली गई। पशुपति पारस ने कहा कि पार्टी के 99 फीसदी कार्यकर्ता, सांसद, विधायक सभी की इच्छा के बाद हम 2014 में एनडीए गठबंधन के पार्ट बने। सबकी इच्छा थी कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए के पार्ट बने रहें। स्वर्गीय पासवान की अंतिम इच्छा थी कि देश का दलित, गरीब, उच्च जाति के गरीब का उत्थान हो। इसलिए उन्होंने गरीब सेना और पार्टी का गठन किया। मैं चाहता हूं कि उनकी यह इच्छा सफल हो। वे अमर रहें।

क्या पशुपति पारस की सिर्फ एलजेपी को बचाने की मंशा है

पशुपति पारस को भनक लग है कि मोदी सरकार में जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार होने वाला है, ऐसे में पशुपति पारस यह सुनहरा मौका नहीं छोड़ना चाहते हैं। अपने हर वक्तव्य में वो खुद को एनडीए का प्रति निष्ठा वाला नेता दर्शा रहे हैं। इससे उनकी मंशा साफ  है कि वो एनडीए में एलजेपी की उस हिस्सेदारी पर दावा ठोंक रहे हैं, जो उनके भाई रामविलास पासवान के निधन से रिक्त हुई थी। पशुपति पारस रामविलास पासवान की राजनैतिक विरासत पर दावा ठोकना चाहते हैं।

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केंद्रीय सरकार में मंत्रिपद की लालसा के चलते टूटी एलजेपी

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प्रिंसराज और पशुपति पारस और वीणा देवी चौधरी महबूब अली और चंदन सिंह का चिराग के एकतरफा फैसलों से नाराज होने को एलजेपी में टूट की वजह बताया जा रहा है। दूसरी तरफ एलजेपी की टूट के सूत्रधार जेडीयू के नेता राजीव सिंह पर ललन रहे हैं। दरअसल चिराग पासवान अपने अडियल रवैये की वजह से नीतीश कुमार की आंखों की किरकिरी बने हुए थे। विधानसभा में जेडीयू की खराब परफॉर्मेंस की वजह नीतीश चिराग पासवान को मानते हैं। इसलिए नीतीश कुमार ने मौका देखते हुए सही समय पर अपनी चाल चल दी। नीतीश कुमार के सहयोग से पशुपति पारस केंद्र में मंत्री बन सकते हैं। पशुपति पारस को नीतीश कुमार का वफादार भी कह सकते है। वह नीतीश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।

चिराग पासवान एक ऐसे नेता हैं जो नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल कर बैठे हैं। अगर पशुपति पारस केंद्र में मंत्री बन जाते हैं तो उनका कद एलजेपी में रामविलास के बाद हो जाएगा। चिराग पासवान की लीडरशिप को वो खत्म कर सकते हैं।

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