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शरद पवार के घर विपक्षी दलों की बैठक, कांग्रेस शामिल नहीं, आखिर क्या हैं क्षेत्रिय दलों की मीटिंग के मायने ?

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नई दिल्ली – सोमवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) के घर विपक्षी दलों की बैठक( Regional Party meeting) हुई जिसमें कई क्षेत्रिय दलों के नेता शामिल हुए। इस बैठक को लेकर बताया गया कि यह पूरी तरह अराजनीतिक हैं। लेकिन मीटिंग की हकिकत कुछ और ही हैं। एक दिन पहले ही शरद पवार ने पेशेवर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर(Prashant Kishore) के साथ बैठक की, जिसके बाद से ही कई तरह कयास सामने आने लगे।

आपको बता दें प्रशांत किशोर( Prashant Kishore) ने हाल ही में हुए बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी की बागडोर को संभाल रखे थे, चुनाव में प्रशांत किशोर के कई दावे सही साबित हुए, और भाजपा की करारी शिकस्त हुई, इससे पहले भी प्रशांत किशोर ने कई क्षेत्रिय दलों के लिए काम कर चुके हैं जिसके बाद उन दलों को जीत भी मिली हैं, ऐसे में अब प्रशांत किशोर की एनसीपी प्रमुख से मुलाकात और एनसीपी प्रमुख की क्षेत्रिय नेताओं के साथ बैठक से साफ संकेत हैं कि अब भाजपा को राष्ट्रीय राजनीति में पटखनी देने तैयारी की जा रही हैं, इन सब के बीच मजेदार बात यह भी है कि क्षेत्रिय दलों के साथ शरद पवार की इस मीटिंग में कांग्रेस का कोई नेता शामिल नहीं हुआ।

‘अराजनीतिक’ करार देने वाली इस मीटिंग को राजनीतिक गलियारों में क्षत्रपों की एकता की कवायद माना जा रहा है। कांग्रेस के साथ सीधे मुकाबलों में बीजेपी कहीं आगे निकल जाती हैं लेकिन क्षेत्रीय दलों या मजबूत क्षत्रपों के सामने भाजपा का प्रदर्शन कुछ खास नहीं होता हैं। वहीं त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबले वाले राज्यों में कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रह रहा है और क्षेत्रीय दल बीजेपी को न सिर्फ टक्कर दे रहे हैं बल्कि करारी शिकस्त भी । हालिया बंगाल चुनाव में टीएमसी ने लगातार तीसरी बार बाजी मारी, तमिलनाडु में डीएमके का जादू चला और केरल में कांग्रेस का प्रदर्शन फीका रहा। इससे क्षेत्रीय दलों में यह भरोसा जगा है कि नरेंद्र मोदी और बीजेपी को कांग्रेस नहीं बल्कि वे एकजुट होकर रोक सकते हैं।

पवार के घर हुई मीटिंग को बीजेपी के खिलाफ मजबूत चुनौती देने के लिए विपक्षी नेताओं के एकजुट होने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, बैठक में शामिल हुए नेताओं ने इसके राजनीतिक महत्व को तवज्जो नहीं देने की कोशिश की और इसे पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा के राष्ट्र मंच के बैनर तले समान विचार वाले लोगों के बीच एक संवाद बताया। तृणमूल कांग्रेस नेता सिन्हा का यह गैर राजनीतिक संगठन बीजेपी विरोधी विचार अभिव्यक्त करता रहा है।

2022 में उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों के अलावा कई अन्य राज्यों में भी विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में क्षेत्रीय क्षत्रपों और गैर भाजपा दलों को एकजुट करने की कोशिश को मुख्य रूप से 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। बीजेपी के केंद्र की सत्ता में आने के बाद से उसके खिलाफ कांग्रेस की तुलना में क्षेत्रीय दलों ने काफी बेहतर प्रदर्शन किया है और उनके द्वारा कहीं अधिक एकजुट तरीके से मोदी सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर चुनौती देने का विचार हाल के समय में दृढ़ हुआ है।

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शरद पवार के घर हुई इस मीटिंग में शामिल हुए सीपीएम के नीलोत्पल बसु ने कहा कि उन्होंने कोविड प्रबंधन, बेरोजगारी जैसे शासन के मुद्दे तथा बीजेपी की तरफ से संस्थाओं पर किए जा रहे कथित हमले पर चर्चा की। साथ ही, उन्होंने बैठक के राजनीतिक महत्व को तवज्जो नहीं दी। पवार, बसु और सिन्हा के अलावा समाजवादी पार्टी के घनश्याम तिवारी, राष्ट्रीय लोक दल के जयंत चौधरी, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला, सीपीआई के बिनय विश्वम और AAP के सुशील गुप्ता, नागरिक समाज संस्थाओं के कई सदस्य बैठक में शामिल हुए।

क्षत्रपों की मीटिंग में कांग्रेस शामिल नहीं

कांग्रेस के कुछ नेताओं को भी आमंत्रित किया गया था लेकिन उनमें से किसी के शरीक नहीं होने से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि मुख्य विपक्षी पार्टी क्षेत्रीय दलों के नेतृत्व वाले मोर्चे का हिस्सा नहीं बनना चाहती है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बैठक पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि यह राजनीति पर चर्चा करने का समय नहीं है।

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