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नई दिल्ली- चंदौली लोकसभा के लिए आज बहुत महत्वपूर्ण दिन है। चंदौली लोकसभा से सांसद चुने गए वीरेंद्र सिंह आज सांसद के तौर पर शपथ लेंगे। 24 जून से संसद सत्र की शुरूआत हो चुकी है। सभी नए चुने गए सांसद को राज्यवार प्रोटेम स्पीकर पद और गोपनीयता की शपथ दिला रहे हैं। आज उत्तर प्रदेश से चुने गए सांसद पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण करेंगे।
वीरेंद्र सिंह की जीत बड़े मायने
चंदौली से समाजवादी पार्टी की टिकट पर सांसद बने वीरेंद्र सिंह की जीत कई मायनों में खास रही है। उन्होंने केंद्र सरकार में लगातार मंत्री रहे एवं भाजपा उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष महेंद्र नाथ पाण्डेय को करारी शिकस्त दी है। महेंद्र नाथ पाण्डेय लगातार दो बार से चंदौली लोकसभा से सांसद थे एवं पिछले मोदी सरकार में भारी उद्योग मंत्रालय संभाल रहे थे। महेंद्र नाथ पाण्डेय की गिनती यूपी भाजपा के कद्दावर नेताओं में होती है। इसके अलावा चंदौली पर भाजपा खूब मेहरबान भी रही है। चंदौली लोकसभा क्षेत्र की पांच विधानसभा में से चार पर भाजपा के विधायक निर्वाचित हुए हैं एवं चंदौली से भाजपा की दो महिला नेत्री साधना सिंह और दर्शना सिंह राज्यसभा सदस्य भी है इसके अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष भी भाजपा के हैं। इतने बड़े लाव-लश्कर के खिलाफ वीरेंद्र सिंह की यह जीत खास हो जाती है। उन्होंने कई फैक्टर्स पर धता बता कर यह जीत हासिल की है।
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चंदौली में मोदी के प्रभाव को लड़कर जीते हैं वीरेंद्र सिंह
चंदौली लोकसभा की भौगोलिक स्थिति देखें तो यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा वाराणसी से लगती लोकसभा है। चंदौली लोकसभा में पांच विधानसभाएं हैं जिसमें सकलडीहा, सैयदराजा, मुगलसराय चंदौली जिले की विधानसभाएं हैं। जबकि वाराणसी जिले की दो विधानसभाएं शिवपुर और अजगरा हैं। शिवपुर और अजगरा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सीधा प्रभाव नजर आता है। सपा सांसद वीरेंद्र सिंह की यह जीत इसलिए भी खास हो जाती है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव से लड़कर यह जीत दर्ज की है।
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अगर सही मायनों में देखा जाए तो यह जीत पूरे उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण जीत है क्योंकि इस जीत ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में मोदी के प्रभाव को क्षीण किया है, इस जीत ने साबित कर दिया है कि सही रणनीति के साथ चुनाव लड़ा जाए तो मोदी के प्रभाव से भी पार पाया जा सकता है। दूसरा यह बड़े केंद्रीय मंत्री के खिलाफ जीत रही है। महेंद्र नाथ पाण्डेय को लेकर उनके समर्थक दावा करते रहे है कि वह विकास पुरूष हैं। उनके समर्थकों का दावा था कि उन्होंने चंदौली में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री पंडित कमलापति त्रिपाठी के बाद चंदौली में विकास कार्य कराए थे।
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