उत्तरप्रदेश में ब्राह्मण किसे वोट कर रहे है? ठाकुरवाद के आरोपों पर क्या बोले डिप्टी सीएम, पढ़े पूरी खबर
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नई दिल्ली – उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। यूपी का किंग कौन होगा इसे लेकर सभी राजनीतिक दल चुनाव मैदान में उतर चुके है। मतदान के करीब आते ही जातिवाद का मुद्दा भी उभरने लगा है साथ ही यूपी सरकार पर आरोप है कि वह प्रशानिक मशीनरी में ठाकुरवाद का बढ़ावा दे रहे है। साथ ही सवाल है कि यूपी के ब्राह्मण इस बार किसे यूपी के किंग के तौर पर देख रहे है? अब इन दोनों सवालों को लेकर डिप्टी सीएम ने सफाई दी है।
डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने टीवी चैनल आजतक से बातचीत में ठाकुरवाद के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये आंकड़ें गलत है। बता दें कि टीवी एंकर ने ठाकुरवाद के कुछ आंकड़े पेश करते हुए यह सवाल किया था, कि राज्य में ज्यादा संख्या में ठाकुर बिरादरी के अफसरों को प्रश्रय दिया जा रहा है. इसके जवाब में दिनेश शर्मा ने कहा कि ये आंकड़े गलत हैं।
दिनेश शर्मा ने कहा कि सिंह टाइटल वाले अफसरों को ठाकुर बता दिया गया है, ये आंकड़े गलत है, इन आंकड़ों को फिर से देखने की जरूरत है। यूपी में सिंह टाइटल लोध, कुर्मी और ब्राह्मण जाति के अलावा दूसरी जातियों के लोग भी लगाते हैं। इन्हें भी ठाकुर बता दिया गया है। ये आंकड़े गलत हैं। आगरा में प्रभु नारायण सिंह को ठाकुर बता दिया लेकिन वे ठाकुर नहीं है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आंकड़े देखकर उन्हें हंसी आती है। दुष्प्रचार होनी चाहिए लेकिन इतना निचले दर्जे का नहीं। डिप्टी सीएम ने कहा कि यूपी के सीएम संत है और संतों की कोई जाति नहीं होती है। हमारे सीएम जहां से जीतते हैं वहां दूसरी जातियों का बाहुल्य है, लेकिन वे वहां से लगातार जीतते रहे हैं।
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क्या यूपी में अभी ब्राह्मण वर्सेज ठाकुर हो रहा है? इसे सिरे से नकारते हुए डॉ दिनेश शर्मा बोले कि बीजेपी में ऐसा नहीं होता है। ये वैसे लोग करते हैं जो जाति के आधार पर सपने देखते हैं. ये ऐसे लोग होते हैं जो अलग अलग जातियों से चेहरे जमा करते हैं गोलबंदी कर सत्ता पर काबिज होते हैं, लेकिन यूपी अब इससे उबर चुका है।
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अजय मिश्रा टेनी को हटाने में बीजेपी की हिचकिचाहट पर डॉ दिनेश शर्मा ने कहा कि ब्राह्मण होने का अर्थ कोई हीन भावना का शिकार होना नहीं है, मेरे भाई मेरे भाई पंडिताई करते हैं। उन्होंने कहा कि वे कर्म से भी ब्राह्मण हैं और जाति से भी। ब्राह्मण होने का मतलब यह है कि न किसी का उत्पीड़न हो और ब्राह्मण का उत्पीड़न किया जाए।
दिनेश शर्मा ने कहा कि बीजेपी टिकट के मामले में जातिगत भेदभाव नहीं करती है, हमारा उद्देश्य सबका साथ, सबका विकास है। विपक्ष अगर ब्राह्मण मतदाताओं को वोट वैंक समझता है तो ये उसकी भ्रांति है। हमारी सरकार हर वर्ग के लिए सोचती है। ब्राह्मण चाहता है कि उसके संस्कार जीवित रहें, उनकी मान्यताएं सुरक्षित रहे। एक समय शिखा रखना और कलावा बांधना हीन भाव का परिचायक समझा जाने लगा था लेकिन अब चीजें बदल गई है। हम बाल्मीकि की प्रतिमा लगाते हैं, संत रविदास, कबीरदास की प्रतिमा लगाते हैं और दूसरे महापुरुषों की प्रतिमा लगाते हैं।
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